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Showing posts with the label Stories

Stories of Leadership - Mary's Journey

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  “ Being a part of MGMD has been a very enriching experience for me. During this time, I have been able to understand myself along with others. I can express myself easily. I got a chance to connect with my community and this connection is priceless for me. Here, I have learned how to know children, understand their needs and how to find solutions to their problems. I have got a lot of support to connect with the nuances of my life. Every partner has worked hard to enhance my learning in a smooth space. Though I feel stuck at times, I am hopeful that together we will figure out ways to move forward. I am delighted to be associated with these kinds of relationships with the MGMD family. Heartfelt thanks to all my colleagues! ” Mary leads a centre in Koyal village and has an interest in working on English. She is currently part of the English Team at MGMD. Her keen work in the classroom centres around the games and activities through which she tries to enhance the learning experien...

सफ़र से सीख और समूह का साथ - टुगेदरनेस टेबल

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“ मुझे किसी के साथ इतना खुलापन कभी महसूस नही होता था पर इस सेशन से मैं खुद के अंदर छुपी भावनाओं को उजागर कर पाई और अपने साथ के लोगों से गहराई से जुड़ पाई हूँ। मुझमें जो झिझक थी वो भी अब खत्म सी हो गई है. अब मैं सबके साथ मेरी भावनाओं को साझा कर सकती हूँ।” गाँव के परिवेश में रहकर पहली दफ़ा अंतर जातीय और अंतर-लैंगिक माहौल का हिस्सा बनी रवीना कहती हैं! विभिन्न आयु, वर्ग, और विचारों को रखने और उनके अनुसार जीने वाले व्यक्तियों के साथ उनकी अपनी भावनाओं को समझने और दूसरों के साथ छोटी छोटी गतिविधियों में रमकर साथियों के विचारों और भावनाओं से जुड़कर लोगों ने ख़ुद के एहसासों, गलतियों, नकारात्मक भाव को स्वीकारने का अनूठा साहस इस सफर में दिखाया है उसे किंचित सरसरी तौर पर जादू कह दें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. हर सत्र के दौरान खेल के रूप में अलग-अलग टास्क को इन सभी लोगों के साथ ‘मिलकर’ पूर्ण करने की जो प्रकिया है उसी में सीखने और साथ चलने का महत्तम छुपा हुआ है. अपनी भावनाओं को पहचान कर, उनकी खोजबीन करना और काम और अनुभव की यादों के स्तर पर उन्हें विभिन्न कोणों से देखते हुए स्वीकार करने के प्रक्रिया इन टास्...

Youth Leading Change in their own Communities - Teena

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Teena hails from Umarni, a small village near Nagda city. She is currently pursuing her graduation from the Government College of Nagda. Her inspiration for education was none other than her own elder sister who used to give tuition to the children at home. There she got developed an interest in education and started doing the same. When she joined Mera Gaon Meri Dunia, it was a key moment for her. In her own words, "I don't think I have missed anything by being with the Sparsh cohort". She teaches a group of 40 children in an Anganwadi centre. She holds a good connection with the children and parents as well. She keeps leveraging her mothers' network for engaging with the community as her Mother is an ASHA worker at one of the Anganwadi of the village. Her key interest is to build the capacity of self in teaching Math and EVS.  Due to her curious nature and ability to identify what she has to learn, she has developed a keen interest in changing the education scenario...

Learning through Art!

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  What is more beautiful than exploring one’s own self through art? Recently, our Sparsh leaders went under an induction for understanding the nuances of the Art-Based learning process. As a project work, our leaders turned their classrooms into experimentation ground for children to explore what art looks like when the way which is opted is of colours. Leaders facilitated the process of making colours from the local resources like leaves of Mehndi, Neem, & Imli trees, the flowers of Kevda, & Gulmohar, and Chukandar. Children at our centres also made brushes out of small branches like Neem, Aankda, etc. The process was total fun and full of learning as students were set free to choose their own tools and methods to make these things. Through Sparsh, we want to create a holistic learning environment for children right from the fundamental level and ensure they receive a quality education at every level and grow with their self-identified pace over time. Want to be a part of ...

किताबों का फ़ितूर

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"बहुत समय के बाद मुझे हिंदी की किताबों में पुराने वाले मज़े आ रहे हैं," हर्ष (बदला हुआ नाम) कक्षा 5 का विद्यार्थी है जो शुरूआती दिनों से स्पर्श शिक्षा केंद्र में आ रहा है. शुरुआती दिनों में उसके कक्षा में हो रहे कामों के अरुचि थी जोकि लगभग हर उस बच्चे के लिए प्राकृतिक थी जो गत 2 साल से स्कूल और पढ़ाई से एकदम कट चुका था.  जब बैजनाथ शिक्षा केंद्र में स्पर्श लीडर चंचल ने प्रथम बुक्स की किताबों की एक लाइब्रेरी बनाई और हर सप्ताह 4 दिन पढ़ने के लिए निश्चित हुए तो हर्ष भी उन बच्चों में शामिल था जो गाहे-बगाहे थोड़ा बहुत पढ़ लेते थे. धीरे धीरे हर्ष अपने मन से पढ़ने के लिए अधिक समय देने लगा और हर रोज़ हिंदी की एक किताब उसके संग उसके घर तक का सफ़र करने लगी. इस महीने के दुसरे सप्ताह तक हर्ष ने शिक्षा केंद्र की लाइब्रेरी में रखी हिंदी की तमाम किताबें पढ़ डाली हैं और अब चंचल के सामने एक लक्ष्य है कि वह हर्ष के लिए आगे का रास्ता तय करने में उसका साथ निभाये. हमें ऐसी लाइब्रेरी के लिए और हर्ष जैसे सैंकड़ों बच्चों के लिए किताबें चाहिए! हमें सहयोग करें: https://bit.ly/3pbDZRn 

शिक्षा यात्रा और अपनों का सहयोग

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सोहन [दायीं ओर] (बदला हुआ नाम) कक्षा 5 का छात्र है जो शुरुआती दिनों से हमारे स्पर्श शिक्षा केन्द्र का विद्यार्थी है। हमारी स्पर्श लीडर तृप्ति कहती हैं कि शुरुआत में सोहन को इंग्लिश के अल्फबेट्स आदि पढ़ने/पहचानने में मुश्किल आती थी और उसका मन भी कम लगता था।  बीते सप्ताह से सोहन अंग्रेज़ी के छोटे छोटे शब्दों को पढ़ने में लगा हुआ है और अब ख़ुद से अपना नाम भी लिख लेता है। मज़ेदार बात यह है इसमें सोहन के पिताजी उसकी मदद कर रहे हैं कि कैसे वह फोनिक साउंड सीख पाए और अंग्रेज़ी पढ़ना सीख सके! हम चाहते हैं कि जिस तरह सोहन के पिता ने उसकी शिक्षा यात्रा में सहयोग करके उससे जुड़ने का काम शुरू किया है। वैसे स्पर्श कक्षा का हर बच्चा अपने माता-पिता को शिक्षा से जोड़ सके और वे अपने बच्चों को सहयोग कर सकें। सोहन जैसे 350 से अधिक बच्चों की शिक्षा यात्रा में आप सहयोग कर सकते हैं: 9993164658@okbizaxis

संग और शिक्षा की यात्रा!

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"दुनिया की सबसे बड़ी ज़रूरतों में शुमार हैं शिक्षित बच्चे और आनंदमयी बचपन!" राधा और रोहिणी कक्षा 5 की दो लड़कियाँ हैं जो हमारे स्पर्श सामुदायिक शिक्षा केन्द्र की नियमित विद्यार्थी हैं। वे अक्सर एक-दूजे के साथ देखी जा सकती हैं; खेल में, आने जाने में और पढ़ने में भी। दोनों एक दूसरे की सीखने की यात्रा में भरपूर सहयोग करती हैं। हाल ही में उन्होंने अंग्रेज़ी की किताब पढ़ना सीखा है वे इस नए अनुभव को बड़े मज़े से जी रही हैं। साथ साथ बड़े उत्साह से पढ़ती हैं और कहानियों का अर्थ बनाने की कोशिशें करती हैं।  बैजनाथ केंद्र का नेतृत्व कर रही हमारी एजुकेशन लीडर चंचल का कहना है कि जितना उत्साह इनको खेलने और मस्ती करने के लिए है उतना ही सीखने और एक-दूसरे के साथ मिल आगे बढ़ने के लिए भी है। हमारी सारी कोशिश है कि हम अपने सभी शिक्षा केन्द्र में बच्चों के सीखने के लिए ख़ुशनुमा माहौल बना सकें और उनके बचपन को आज़ाद और आनंदमयी होने में एक रत्ती का सहयोग कर सकें। हम शिक्षा केंद्र के लिए किताबें जुटा रहे हैं आप हमें उसके लिए सहयोग कर सकते हैं: https://donateabook.org.in/campaign/meragaonmeridunia/  

पढ़ने की ललक

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 सूरज (बदला हुआ नाम) आजमाबाद स्पर्श शिक्षा केंद्र में नियमित पढ़ने आता है वह कक्षा 5वीं में पढ़ता है. स्कूल के प्रति उसकी रूचि कम रही है ऐसा वहाँ के शिक्षक बताते हैं, किन्तु स्पर्श कक्षा में वह शुरुआत से आ रहा है. शुरूआती दिनों में कक्षा के डिज़ाइन या गतिविधियों में उसकी अरुचि साफ़ दिखाई पड़ती थी. पिछले कुछ दिनों में एक ख़ास बदलाव यह आया है कि वह समय से पहले कक्षा आ जाता है और हमारी कक्षा के सर्किल के लिए सेंटर पीस बनाता है और अंत तक उसका ध्यान रखता है।  पिछले सप्ताह टेस्ट के समय सूरज ने तय समय से पहले टेस्ट पूरा कर कक्षा के लिए चार्ट बनाने का काम किया. सूरज की कक्षा और इसके माहौल के प्रति बढ़ती रूचि को देख अपने काम में और उर्जा भरने की प्रेरणा मिलती है. सूरज की सहपाठी वाली अर्चना बताती है कि सूरज के व्यवहार में बदलाव आ रहा है और वह पहले की तुलना में अब अच्छे से सीख रहा है और जल्द ही धीरे-धीरे वह सब सीख जाएगा। आजमाबाद के स्पर्श शिक्षा केंद्र का नेतृत्व मनीषा कर रही हैं; सूरज की यह कहानी वाकई हम सबके लिए प्रेरणास्त्रोत है. मेरा गाँव मेरी दुनिया इस तरह के बदलावों के प्रतिबद्ध है, शुभका...

Team Visiting River-Side School Ahmedabad!

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  रीवर साइड स्कूल, भारत के उन स्कूलों में शामिल किया जाता है जिन्हें एक अद्धभुत और अलग स्कूल कहा जा सकता हैं। रीवर साइड की कई प्रक्रियाओं को भारत और दुनिया के विभिन्न जगह अपनाया गया हैं।  मेरा गाँव मेरा दुनिया हमेशा लगातार हर जगह से सीखने पर फोकस करता है ताकि हम लोगों की सीख से आगे बढ़ सकें।  मेरा गाँव मेरी दुनिया ने इस बार रीवर साइड स्कूल को ना केवल विजिट किया बल्कि उसके संस्थापक किरण बीर सेठी से चर्चा भी की। श्रुति और रीवर साइड की टीम ने उनकी बेस्ट प्रैक्टिस पर चर्चा की और रीवर साइड लर्निंग सेंटर के बारे में बताया। हमने 04 क्लासरूम को भी ऑब्जर्व किया और सीधे क्लासरूम में क्या क्या होता है ये समझा। शुक्रिया रीवर साइड और किरण मेम, जिन्होंने हमें अवसर दिया।

Pledge Card Signature Drive in Communities!

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We are working for the effective implementation of infrastructural provisions of RTE 2009, in rural Government Schools of Mahidpur through our Campaign #MeraSchoolSafeBhiSaafBhi in association with Youth Ki Awaaz.  Our youth leaders led this pledge signing drive in 9 villages where they got signatures of parents of a girl child to support their daughters in their education journeys! The pledge goes like this ' मैं अपनी बेटी और उसके भविष्य को सँवारने के लिए शपथ लेता हूँ कि मैं अपनी बेटी का जहाँ तक गाँव में या समीप के गाँव में स्कूल है वहाँ तक पढ़ने में सहयोग करूँगा/करूंगी!" We were able to get 420 signatures from these community signature drives.

Library - A Door towards unending learning!

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  "Having access to the library is an essential tool of ideological liberation for a child!" One of our Sparsh Community Centers situated in Azmabad, witness a process of setting up a library by Education Leader Manisha and children who study there. Children themselves finalized the space, arrangement, and required resources for the library and Manisha facilitated this process. We express our heartfelt gratitude to Pratham Books for providing us with books that are level appropriate for the children studying in all the centers. Through these books, we are able to engage children in reading, writing, visualizing, and doing conceptual analysis of things. We wish one day every child of these villages has access to the library! Support us for sustaining such ecosystems for learning in 10 villages.

Expanding ways of Learning!

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Relating things to the nearest environment makes the process of learning easier for the children. Our Sparsh Education Leader Manisha who runs a community center in her village Azmabad did some experiments in her classroom. While teaching EVS she brought the actual environment in the class with some TLMs. She with some living plants and their parts brought the children much nearer to the energy of ethos. She then made children familiar with plants, their types, and parts of plants. For children, the process was engaging and fun to connect and learn. We wish to create such ethos for every child we engage with. Support us in sustaining ecosystems for 10 villages : http://meragaonmeridunia.org/donate.php  

सीखने की आज़ादी

  सीखने की प्रक्रिया में बच्चों को दी गई आज़ादी उनके व्यक्तित्व सृजन के कुछ अभिन्न पहलुओं को तराशती है. हमारे स्पर्श सामुदायिक शिक्षा केंद्र बैजनाथ के बच्चों ने अपनी कक्षा के बाहर लहसून, गेंहू, और धनिया के बीजों को डालकर उनका छोटा सा खेत तैयार किया है. यह बच्चे कक्षा के अलावा मिले समय में मिलकर इसकी देखभाल करते हैं और समय समय पर जिन चीज़ों की ज़रूरत खेत को होती है उसका प्रबंध करते हैं.  बच्चे इस प्रक्रिया को बड़े मज़े से कर रहे हैं और उन्हें बहुत कुछ नया करने का मन है. घर से मिले खेती के अनुभव को वो इसके माध्यम से नया रुप दे रहे हैं. हम चाहते हैं कि हमारे सभी केंद्र के बच्चे इस अनुभव को महसूस करें और अपनी शिक्षा यात्रा को आनंदमयी बनाए. Visit our website for more info: www.meragaonmeridunia.org/

स्पर्श - बदलाव के बीज बोते युवा साथी

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तृप्ति हमारी स्पर्श एजुकेशन लीडर है. तृप्ति काजीखेड़ी, महिदपुर में तीसरी से पांचवी कक्षा के बच्चों के साथ स्कूल में कक्षाएँ लेती हैं. और, उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों जैसे खेल, कहानी, ड्राइंग से भी जोड़े रखती है. कुछ ऐसे भी बच्चे हैं जो पहले स्कूल ही नहीं आते थे जब अपनी कक्षा के बाकी बच्चों को उन्होंने समय से पहले स्कूल जाते देखा तो उनके ज़रिए वे भी तृप्ति की क्लास में आने लगे. अब वह स्कूल भी आने लगे हैं. तृप्ति मेरा गाँव मेरी दुनिया से जुड़ने से पहले भी कुछ स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थी. बच्चों के साथ उनकी सीखने की यात्रा में जुड़ने का उनका सपना उन्हें हमसे जोड़ता है. तृप्ति चाहती हैं कि वे शिक्षा में सुधार और शिक्षा से जुड़े क्षेत्रों में कुछ गहरा और अर्थपूर्ण कार्य करना चाहती हैं. पिछले सप्ताह तृप्ति का जन्मदिन था. बच्चों ने उनके जन्मदिन को एक उत्मसव की तरह मनाकर इस अवसर को तृप्ति के लिए बहुत यादगार और आनंदमयी बना दिया.  मेरा गाँव मेरी दुनिया परिवार की शुभकामनाएं हैं कि तृप्ति इसी तरह बच्चों के साथ जुड़ी रहे, अपने आप के साथ जुड़ी रहे, और आगे बढ़ती रहें!

मेरा स्कूल safe भी साफ़ भी - 4

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  मेरा गाँव मेरी दुनिया, यूथ की आवाज़ के साथ मिलकर पिछले एक महीने से महिदपुर तहसील में गाँव की स्कूल छोड़ रही लड़कियों और छोड़ चुकी लड़कियों को फिर स्कूल लाने के लिए एक मुहीम मेरा स्कूल safe भी साफ़ भी पर काम कर रही है. हमने 7 गाँव में सर्वे के दौरान पाया कि मात्र 2 स्कूल RTE के प्रावधानों पर खरे उतरे थे. और कई स्कूल में टॉयलेट्स की हालत गंभीर थी जो इस्तेमाल भी नहीं किये जा सकते हैं; ख़ासकर लड़कियों के लिए बने टॉयलेट्स. थोड़ा और गहरे स्तर पर बच्चों से बात करके हमने जाना कि कई स्कूल में टॉयलेट्स में दरवाजे नहीं हैं, लड़कों के लिए बने टॉयलेट्स पर ताला होता है तो वे खुले में ही प्रसाधन के लिए जाते हैं और लड़कियों के लिए इस्तेमाल होने वाले टॉयलेट्स में पानी की सीधी सुविधा नहीं है. या तो उन्हें हैंडपंप से पानी भरकर लाना होता है या पास बने किसी के घर या खेत से. व्यवस्था और प्रशासन की अनदेखी से स्कूल में पर्याप्त सुविधायें नहीं हैं जिसकी वजह से लड़कियों और लड़कों को मुश्किलें आती हैं. सर्वे में हमने पाया कि एक बड़ी वजह जिसके कारण लडकियाँ स्कूल छोड़ती है वह है पीरियड्स पर स्कूल द्वारा जानकारी/मदद का अभाव...

मेरा स्कूल Safe भी साफ़ भी - 3

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 Through our campaign #MeraSchoolSafeBhiSaafBhi, we ( Mera Gaon Meri Dunia ) are working with Youth Ki Awaaz to get back the girls who have dropped out from school and support those who are planning to drop out. One of our friends Nidhika, who is able to establish herself as an independent individual through her education, has something to share with everyone and those girls who are thinking of dropping out! शुरूआती स्कूल के वर्षों में यानिकी 7-8 वीं तक सब कुछ सामान्य सा रहा क्योंकि स्कूल गाँव में ही था और दूर भी नहीं था. लेकिन जब 8वीं से आगे पढ़ने की बात आई तो यह सवाल पूरे परिवार के मन में था कि इतना दूर भेजना क्यों है और क्या ही ज़रूरत है इसे आगे पढ़ने की, लड़की ही तो है क्या करेगी पढ़कर! माता-पिता का सहयोग मिला और मैं आगे पढ़ पाई, फिर भी नया माहौल और नए लोगों के बीच एक दम से जाना थोड़ा मुश्किल था. 11वीं में सब्जेक्ट चुनने की चिंताएं इस हद तक बढ़ गई थी कि मैं स्कूल छोड़ देने का ख़याल करने लगी थी. उस वक़्त पापा और मेरी मौसी के सहयोग और सलाह से मैं ख़ुद पर यकीन कर पाई और अपनी 12 वीं तक की पढ़ा...

मेरा स्कूल safe भी साफ़ भी - 2

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मेरा गाँव मेरी दुनिया, यूथ की आवाज़ के साथ मिलकर इस समय महिदपुर तहसील के कुछ गाँवों में स्कूल छोड़ रही और छोड़ चुकी लड़कियों को फिर से स्कूल लाने के लिए एक मुहीम मेरा स्कूल safe भी साफ़ भी पर काम कर रही है.  हमने 7 गाँव में सर्वे किया और पाया कि मिडिल और हाई स्कूल में पढ़ने वाली अधिकांश लडकियाँ अपने स्कूल में स्वच्छ और पानी की सुविधायुक्त टॉयलेट्स से वंचित है. ज्यादातर स्कूल में टॉयलेट्स तो हैं लेकिन पानी की सुविधा नहीं है जिसके कारण लड़कियों को आम दिनों और पीरियड्स के दिनों में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. लगभग 90% प्रतिशत लडकियाँ पीरियड्स के दौरान स्कूल जाती ही नहीं हैं; जिससे उनका दैनिक जीवन और पढ़ाई दोनों प्रभावित होते हैं. कुछ स्कूल में टॉयलेट्स उपयोग किये जाने वाली अवस्था में ही नहीं है. सिर्फ 2 स्कूल RTE के सारे प्रावधानों पर खरे उतर पाए. हम इस मुहीम के द्वारा RTE 2009 में उल्लेखित स्कूल के मापदंडो को लागू करवाने और स्कूल के कैंपस को उन्हीं के आधार पर बनाये जाने के लिए कार्यरत हैं ताकि अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और अपना भविष्य ख़ुद संवारें. आप किसी तरह से कुछ करना चाहते हैं तो...

मेरा स्कूल Safe भी साफ़ भी - 1

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Through our campaign Mera School Safe Bhi Saaf Bhi, we ( Mera Gaon Meri Dunia ) in collaboration with Youth Ki Awaaz are working to get the girls back into the schools who have dropped out from school and support those who are thinking to drop out. One of our friends Saroj, who have been an independent one through her education has something to share with everyone and especially to those who are thinking of dropping out! "मेरे जैसी ज्यादातर लड़कियाँ अपने आसपास या गाँव में अच्छा स्कूली माहौल न होने के कारण पढ़ाई बीच में ही छोड़ दिया करती हैं क्योंकि उनके पास बाहर जाकर पढ़ने का अवसर नहीं होता। उन्हें समझाया जाता है कि बाहर रहकर पढ़ाई करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। आमतौर पर लड़की हिम्मत ही नहीं जुटा पाती कि आगे कुछ कर सके या हिम्मत कर भी ले तो उसे बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। घर से क्लासरूम तक वैसा माहौल मिलता नहीं जिसमें वह सहज महसूस करे। एक लड़की को पढ़ाई से ज्यादा फिक्र अपने चरित्र को बचाने की होती है और ऐसे में कोई लड़की अपने व्यक्तित्व का विकास कैसे कर पाएग...

SPARSH - Building Rural Educational Leaders

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"While taking the self academic assessment, I realized that how much children have to do when it comes to studying and tests and that put me in shock, I am still wondering how this can be overcome in the teaching process,"   says   Manisha   of our Sparsh Fellows. Who is going to take  ownership of transforming the education scenario in the villages ?  We found that  94 percent of children  in the  rural Mahidpur road cluster   cant read 2nd level text . Mera Gaon Meri Dunia started  Sparsh  with 10 rural youth to lead the education transformation in the villages.  10 youth  are selected from  125+ applications  after  06 steps long process . These youth are going to work with the government school in their village and lead the educational change in their own villages. Our Goal for the next 03 years is to build the capacity of these rural youth to bring systematic change in education .   Sparsh initiati...

मासिक धर्म और दुनिया

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  विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर मेरा गाँव मेरी दुनिया को 06 गांवों में महिलाओं को सैनेटरी पैड्स बांटने का अवसर मिला, वर्तमान में हमारा लक्ष्य है कि हम 50 गांवो तक पहुँच पाएं. गाँव में जहाँ एक तरफ मासिक धर्म या पीरियड्स के बारे में बात करना तक हिकारत की नज़रों से देखा जाता है; उस वक़्त में हमारी सारी कोशिश है कि कोरोनाकाल के इस संकट में हम स्थानीय लोगों की मदद से जैसे सरपंच, आंगनवाडी कार्यकर्ता और आशा सहायिकाओं के साथ मिलकर, कैसे लोगों को इस बारे में थोड़ा जागरूक बना पाएं और उपलब्ध संसाधनों की सुविधा महिलाओं और लड़कियों तक पहुँच पाए. ग्रामीण प्रशासन और कई स्वयंसेवियों के सहयोग से हमने 28 मई 2021 को ग्राम झूटावद, हाटपिपल्या, कोयल, देवली, बप्पैया और गोगापुर में पैड्स बाँटे.