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मासिक धर्म और दुनिया

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  विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर मेरा गाँव मेरी दुनिया को 06 गांवों में महिलाओं को सैनेटरी पैड्स बांटने का अवसर मिला, वर्तमान में हमारा लक्ष्य है कि हम 50 गांवो तक पहुँच पाएं. गाँव में जहाँ एक तरफ मासिक धर्म या पीरियड्स के बारे में बात करना तक हिकारत की नज़रों से देखा जाता है; उस वक़्त में हमारी सारी कोशिश है कि कोरोनाकाल के इस संकट में हम स्थानीय लोगों की मदद से जैसे सरपंच, आंगनवाडी कार्यकर्ता और आशा सहायिकाओं के साथ मिलकर, कैसे लोगों को इस बारे में थोड़ा जागरूक बना पाएं और उपलब्ध संसाधनों की सुविधा महिलाओं और लड़कियों तक पहुँच पाए. ग्रामीण प्रशासन और कई स्वयंसेवियों के सहयोग से हमने 28 मई 2021 को ग्राम झूटावद, हाटपिपल्या, कोयल, देवली, बप्पैया और गोगापुर में पैड्स बाँटे.

कोविड और मानवता के तार

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जब हमारी टीम के दो को-फाउंडर कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद होम आइसोलेशन में थे तो पास ही एक साथी स्वदेश जी ने खूब सारे फल और एक छोटा सा संदेश लिख कर दिया था "गेट वेल सून!" उनके इस उदारता भरे काम ने हमें भी इस चैन को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया और अब हमारी वालंटियर्स की और  मेरा गांव मेरी दुनिया द्वारा आइसोलेशन में रहने वाले लोगों और कोविड केयर हॉस्पिटल में फल बांटने का काम किया जा रहा है। यह फल हम सीधे किसानों से खरीद रहे है क्योंकि वे वर्तमान में मंडी बंद होने की वजह से कहीं भी अपना उत्पाद बेच नहीं पा रहे हैं।

लॉकडाउन की साथी - किताबें

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कुलदीप मेरा गाँव मेरी दुनिया के सामुदायिक पुस्तकालय से अक्सर किताबें ले जाकर पढ़ता रहता है। यह कुलदीप के दादाजी है, उन्होंने भी अब किताब लेकर पढ़ना शुरू किया है। दादाजी "मैला आँचल" पुस्तक आधी से ज्यादा पढ़ चुके है और उनको किताब बहुत ही बढ़िया लग रही है। अगर झुटावद में कोई बुज़ुर्ग चारों वेद, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की किताबें, विनोबा भावे की मैगज़ीन या कहानियाँ या कविताये पढ़ना चाहे तो हमसे ले सकते हैं। अगर कोई बच्चे बच्चों की किताबें चाहे तो वे भी सचित्र खूब सारी मिल जाएगी। आप पढ़िए और पढ़ कर वापिस कर दीजिए। किताबे लॉक डाउन की अच्छी साथी है।

Story of A Young Girl Following Her Dreams!

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What could be more beautiful than witnessing young girls from rural Madhya Pradesh following their dreams and hobbies! Sunita(changed name) is 15 years old and hails from a small village in Ratlam district of MP. Nikita (Our Mission Malwa fellow) met her during her fellowship work there. In one of the sharing circles, Sunita shared that she has an interest in singing. She used to create videos over some mobile applications and sing there. Nikita and some other friends helped her to create a future plan to work upon her dreams. She is preparing herself to sing at 'kirtans' & 'jagratas' which take place in villages as a means of devotion. Such girls inspire us to work more courageously upon what we are doing.

फेसिलिटेशन और सिखने की यात्रा

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जब हम सीखने की सीढ़ियाँ देखें तो ज्ञान सबसे नीचे है और वो वाकई सब के पास आजकल काफी होता है, लेकिन कुछ पायदान ऊपर होता है कि कैसे आप उसे खुद में शामिल कर लेते हो और फिर उसे एप्लाई कर सको या उसकी समझ से कुछ नया बना सको| योगेश (गेम चेंजर्स - संस्थापक) द्वारा संचालित फेसिलिटेशन  की 50 घंटों की मैराथन एक प्रोग्राम के तौर पर ना केवल अनुपमेय और अद्भुत है बल्कि एक साधना की तरह है| यह एक ऐसी साधना है जिसमें बाहर और भीतर दोनों और से एक यात्रा चलती है | एक यात्रा है जिसमें सेशन है, बाते हैं, खेल है कुछ सिद्धांत हैं और आपके साथ है कुछ बेहतरीन साथी, वहीं दूसरी और ये अंदरूनी बदलाव है | यह मैराथन एक ऐसा आईना है जो एक फेसिलिटेटर को उसकी कमजोरियाँ उतनी ही खूबसूरती से बताता है जितनी खूबसूरती से ताकत| गजब तो यह है कि ना केवल आप देख पाते हो बल्कि अपने बाजुओं में वो मसल भी बनाते हो कि कैसे बेहतर को और बेहतरी से उपयोग किया जाये और बाकी जगह जहाँ संभावना है उसे कैसे पूरा किया जाये| बहरहाल, इस मैराथन ने विभिन्न सिद्धांतों को अपने जेहन में उतार देने का और उन्हें प्रयोग करने का एक अनूठा अवसर दिया| दो तरीके से सीध

Sparsh Classroom Diary

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Our Sparsh classroom in Petlawad celebrates Friday as a day to learn while gaming and exploring the things around them. On one of Fridays in April, our class facilitator Kamlesh brought the idea of exploring the body and the way we and others see and touch it. Kamlesh facilitated the discussion about Good Touch & Bad Touch while exploring the correct names of body parts to impart awareness among the children of class and furthermore children with whom these children engage beyond the classroom space. The response of the children was quite receptive towards this discussion and they also took part while addressing the doubts of their mates. We are aspiring to run 10 such community classrooms in the villages of Mahidpur Road Cluster. Support us: https://cutt.ly/jgEH6dP

From the Researcher's Diary

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We are assessing the learning outcomes of children in the villages of the Ujjain district. A local youth researcher looks for 10 children from each village to answer questions giving an account of their mathematical and comprehensive abilities. We plan to cover 17 such villages. As the researcher reaches a new village, the children surround him. The early volunteers who are also government school children bravely get in other children to participate. It doesn't take long for parents to get attracted to an unknown commotion in their village, curiously trying to find who is interested in their child's studies. They often encourage their children to perform, often prompting them to write answers. Since the pandemic has knocked down the education structure, especially in the grassroots, it has become imperative to understand the learning gaps it has created among the children in the villages. MGMD is curious to understand this gap and design an informed intervention, in our quest t