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Learning through Art!

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  What is more beautiful than exploring one’s own self through art? Recently, our Sparsh leaders went under an induction for understanding the nuances of the Art-Based learning process. As a project work, our leaders turned their classrooms into experimentation ground for children to explore what art looks like when the way which is opted is of colours. Leaders facilitated the process of making colours from the local resources like leaves of Mehndi, Neem, & Imli trees, the flowers of Kevda, & Gulmohar, and Chukandar. Children at our centres also made brushes out of small branches like Neem, Aankda, etc. The process was total fun and full of learning as students were set free to choose their own tools and methods to make these things. Through Sparsh, we want to create a holistic learning environment for children right from the fundamental level and ensure they receive a quality education at every level and grow with their self-identified pace over time. Want to be a part of the

किताबों का फ़ितूर

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"बहुत समय के बाद मुझे हिंदी की किताबों में पुराने वाले मज़े आ रहे हैं," हर्ष (बदला हुआ नाम) कक्षा 5 का विद्यार्थी है जो शुरूआती दिनों से स्पर्श शिक्षा केंद्र में आ रहा है. शुरुआती दिनों में उसके कक्षा में हो रहे कामों के अरुचि थी जोकि लगभग हर उस बच्चे के लिए प्राकृतिक थी जो गत 2 साल से स्कूल और पढ़ाई से एकदम कट चुका था.  जब बैजनाथ शिक्षा केंद्र में स्पर्श लीडर चंचल ने प्रथम बुक्स की किताबों की एक लाइब्रेरी बनाई और हर सप्ताह 4 दिन पढ़ने के लिए निश्चित हुए तो हर्ष भी उन बच्चों में शामिल था जो गाहे-बगाहे थोड़ा बहुत पढ़ लेते थे. धीरे धीरे हर्ष अपने मन से पढ़ने के लिए अधिक समय देने लगा और हर रोज़ हिंदी की एक किताब उसके संग उसके घर तक का सफ़र करने लगी. इस महीने के दुसरे सप्ताह तक हर्ष ने शिक्षा केंद्र की लाइब्रेरी में रखी हिंदी की तमाम किताबें पढ़ डाली हैं और अब चंचल के सामने एक लक्ष्य है कि वह हर्ष के लिए आगे का रास्ता तय करने में उसका साथ निभाये. हमें ऐसी लाइब्रेरी के लिए और हर्ष जैसे सैंकड़ों बच्चों के लिए किताबें चाहिए! हमें सहयोग करें: https://bit.ly/3pbDZRn 

शिक्षा यात्रा और अपनों का सहयोग

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सोहन [दायीं ओर] (बदला हुआ नाम) कक्षा 5 का छात्र है जो शुरुआती दिनों से हमारे स्पर्श शिक्षा केन्द्र का विद्यार्थी है। हमारी स्पर्श लीडर तृप्ति कहती हैं कि शुरुआत में सोहन को इंग्लिश के अल्फबेट्स आदि पढ़ने/पहचानने में मुश्किल आती थी और उसका मन भी कम लगता था।  बीते सप्ताह से सोहन अंग्रेज़ी के छोटे छोटे शब्दों को पढ़ने में लगा हुआ है और अब ख़ुद से अपना नाम भी लिख लेता है। मज़ेदार बात यह है इसमें सोहन के पिताजी उसकी मदद कर रहे हैं कि कैसे वह फोनिक साउंड सीख पाए और अंग्रेज़ी पढ़ना सीख सके! हम चाहते हैं कि जिस तरह सोहन के पिता ने उसकी शिक्षा यात्रा में सहयोग करके उससे जुड़ने का काम शुरू किया है। वैसे स्पर्श कक्षा का हर बच्चा अपने माता-पिता को शिक्षा से जोड़ सके और वे अपने बच्चों को सहयोग कर सकें। सोहन जैसे 350 से अधिक बच्चों की शिक्षा यात्रा में आप सहयोग कर सकते हैं: 9993164658@okbizaxis

संग और शिक्षा की यात्रा!

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"दुनिया की सबसे बड़ी ज़रूरतों में शुमार हैं शिक्षित बच्चे और आनंदमयी बचपन!" राधा और रोहिणी कक्षा 5 की दो लड़कियाँ हैं जो हमारे स्पर्श सामुदायिक शिक्षा केन्द्र की नियमित विद्यार्थी हैं। वे अक्सर एक-दूजे के साथ देखी जा सकती हैं; खेल में, आने जाने में और पढ़ने में भी। दोनों एक दूसरे की सीखने की यात्रा में भरपूर सहयोग करती हैं। हाल ही में उन्होंने अंग्रेज़ी की किताब पढ़ना सीखा है वे इस नए अनुभव को बड़े मज़े से जी रही हैं। साथ साथ बड़े उत्साह से पढ़ती हैं और कहानियों का अर्थ बनाने की कोशिशें करती हैं।  बैजनाथ केंद्र का नेतृत्व कर रही हमारी एजुकेशन लीडर चंचल का कहना है कि जितना उत्साह इनको खेलने और मस्ती करने के लिए है उतना ही सीखने और एक-दूसरे के साथ मिल आगे बढ़ने के लिए भी है। हमारी सारी कोशिश है कि हम अपने सभी शिक्षा केन्द्र में बच्चों के सीखने के लिए ख़ुशनुमा माहौल बना सकें और उनके बचपन को आज़ाद और आनंदमयी होने में एक रत्ती का सहयोग कर सकें। हम शिक्षा केंद्र के लिए किताबें जुटा रहे हैं आप हमें उसके लिए सहयोग कर सकते हैं: https://donateabook.org.in/campaign/meragaonmeridunia/  

पढ़ने की ललक

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 सूरज (बदला हुआ नाम) आजमाबाद स्पर्श शिक्षा केंद्र में नियमित पढ़ने आता है वह कक्षा 5वीं में पढ़ता है. स्कूल के प्रति उसकी रूचि कम रही है ऐसा वहाँ के शिक्षक बताते हैं, किन्तु स्पर्श कक्षा में वह शुरुआत से आ रहा है. शुरूआती दिनों में कक्षा के डिज़ाइन या गतिविधियों में उसकी अरुचि साफ़ दिखाई पड़ती थी. पिछले कुछ दिनों में एक ख़ास बदलाव यह आया है कि वह समय से पहले कक्षा आ जाता है और हमारी कक्षा के सर्किल के लिए सेंटर पीस बनाता है और अंत तक उसका ध्यान रखता है।  पिछले सप्ताह टेस्ट के समय सूरज ने तय समय से पहले टेस्ट पूरा कर कक्षा के लिए चार्ट बनाने का काम किया. सूरज की कक्षा और इसके माहौल के प्रति बढ़ती रूचि को देख अपने काम में और उर्जा भरने की प्रेरणा मिलती है. सूरज की सहपाठी वाली अर्चना बताती है कि सूरज के व्यवहार में बदलाव आ रहा है और वह पहले की तुलना में अब अच्छे से सीख रहा है और जल्द ही धीरे-धीरे वह सब सीख जाएगा। आजमाबाद के स्पर्श शिक्षा केंद्र का नेतृत्व मनीषा कर रही हैं; सूरज की यह कहानी वाकई हम सबके लिए प्रेरणास्त्रोत है. मेरा गाँव मेरी दुनिया इस तरह के बदलावों के प्रतिबद्ध है, शुभकामनाएं मनी

Team Visiting River-Side School Ahmedabad!

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  रीवर साइड स्कूल, भारत के उन स्कूलों में शामिल किया जाता है जिन्हें एक अद्धभुत और अलग स्कूल कहा जा सकता हैं। रीवर साइड की कई प्रक्रियाओं को भारत और दुनिया के विभिन्न जगह अपनाया गया हैं।  मेरा गाँव मेरा दुनिया हमेशा लगातार हर जगह से सीखने पर फोकस करता है ताकि हम लोगों की सीख से आगे बढ़ सकें।  मेरा गाँव मेरी दुनिया ने इस बार रीवर साइड स्कूल को ना केवल विजिट किया बल्कि उसके संस्थापक किरण बीर सेठी से चर्चा भी की। श्रुति और रीवर साइड की टीम ने उनकी बेस्ट प्रैक्टिस पर चर्चा की और रीवर साइड लर्निंग सेंटर के बारे में बताया। हमने 04 क्लासरूम को भी ऑब्जर्व किया और सीधे क्लासरूम में क्या क्या होता है ये समझा। शुक्रिया रीवर साइड और किरण मेम, जिन्होंने हमें अवसर दिया।

Pledge Card Signature Drive in Communities!

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We are working for the effective implementation of infrastructural provisions of RTE 2009, in rural Government Schools of Mahidpur through our Campaign #MeraSchoolSafeBhiSaafBhi in association with Youth Ki Awaaz.  Our youth leaders led this pledge signing drive in 9 villages where they got signatures of parents of a girl child to support their daughters in their education journeys! The pledge goes like this ' मैं अपनी बेटी और उसके भविष्य को सँवारने के लिए शपथ लेता हूँ कि मैं अपनी बेटी का जहाँ तक गाँव में या समीप के गाँव में स्कूल है वहाँ तक पढ़ने में सहयोग करूँगा/करूंगी!" We were able to get 420 signatures from these community signature drives.